पूर्वजों की आत्मा की शांति व मुक्ति हेतु शास्त्रोक्त विधि से संपन्न करवाई जाने वाली प्रमुख सेवाएं
पिंड दान हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि व उनकी आत्मा की मुक्ति के लिए किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कर्मकांड है। गयाजी में फल्गु नदी तट व विष्णुपद मंदिर परिसर में पिंड दान करने का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है।
इस विधि में जौ, चावल, तिल व गंगाजल से बने पिंड अर्पित कर पूर्वजों को तृप्त किया जाता है, साथ ही जल तर्पण द्वारा उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की जाती है।
त्रिपिंडी श्राद्ध विशेष रूप से तब किया जाता है जब परिवार में बार-बार कष्ट, पितृ दोष अथवा किसी पूर्वज की अकाल मृत्यु से संबंधित अशांति महसूस हो। इसमें तीन पीढ़ियों (पिता, दादा, परदादा) के निमित्त तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं।
यह कर्मकांड विशेष मंत्रोच्चार व विधि-विधान के साथ संपन्न होता है, जिससे पितरों को तृप्ति व परिवार को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
नारायण बली उन आत्माओं की शांति व मुक्ति हेतु किया जाता है जिनकी मृत्यु अकाल, दुर्घटना अथवा असामान्य परिस्थितियों में हुई हो। यह विधि त्रिपिंडी श्राद्ध के साथ मिलकर संपन्न की जाती है।
भगवान नारायण की पूजा-अर्चना सहित यह कर्मकांड अतृप्त आत्माओं को शांति प्रदान कर परिवार को उनके प्रभाव से मुक्त करता है।
प्रत्येक कर्मकांड की अवधि, आवश्यक सामग्री व दक्षिणा परिवार के सदस्यों की संख्या व विधि अनुसार भिन्न होती है — कृपया सटीक जानकारी हेतु सीधे संपर्क करें।