संपूर्ण मेवाड़ क्षेत्र, उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, रायसम्बंध, नाथद्वारा, बासवाड़ा, प्रतापगढ़ (बड़ी शादड़ी, छोटी शादड़ी, दरियावात, डुंगला, भदेशर )
रियासत रीवाँ, सतना, सिधी, सहडोल, उमरिया, अनुपपुर, मऊगंज, सिंगरौली, मैहर
इलाहाबाद-बारा, शंकरगढ़, 365 गांव, कसौटा, करछना, बांदा, हमीरपुर एवं अन्य जिले
राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों के यजमान परिवार पीढ़ियों से जुड़े हैं
स्व. चुन्नी लाल गोस्वामी जी के तस्य पुत्र — श्री विजय लाल गोस्वामी जी पंचमहल्ला गोस्वामी भवन गया जी तीर्थ पुरोहित हैं। पीढ़ियों से यजमानों को श्रद्धापूर्वक पिंड दान व श्राद्ध कर्म संपन्न करवाते आ रहे हैं।
स्व. चुन्नी लाल गोस्वामी जी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए
वेद-पुराण अनुसार विधिपूर्वक संपन्न करवाई जाने वाली प्रमुख सेवाएं
फल्गु नदी तट व विष्णुपद मंदिर में पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु पिंड दान एवं जल तर्पण की संपूर्ण विधि।
विस्तार से जानें →अकाल मृत्यु, पितृ दोष व वंश शांति हेतु तीन पीढ़ियों के लिए किया जाने वाला विशेष श्राद्ध कर्म।
विस्तार से जानें →अतृप्त व अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं की मुक्ति हेतु नारायण बली एवं शांति पूजन विधिपूर्वक संपन्न।
विस्तार से जानें →प्रत्येक कर्मकांड वेद-पुराण की परंपरा अनुसार पूर्ण श्रद्धा व मंत्रोच्चार सहित संपन्न करवाया जाता है।
बिना किसी भेदभाव के हर जाति व गौत्र के यजमानों की पूजा-अर्चना सम्मानपूर्वक करवाई जाती है।
स्टेशन/रास्ते के दलालों से बचाव व ठहरने-भोजन में सीधा मार्गदर्शन — बुकिंग सीधे परिवार से करें।
गयाजी में करवाई जाने वाली प्रमुख श्राद्ध विधियों व तीर्थ स्थलों की सचित्र झलक